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    Varanasi Student Commits Suicide In Prayagraj – प्रयागराज में वाराणसी के छात्र ने दी जान, परिजनों में मचा कोहराम

     

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    वाराणसी के सेवापुरी क्षेत्र के गद्दोपुर गांव निवासी जीत नारायन यादव के बेटे मौसम यादव (23) के प्रयागराज में फंदा लगाकर जान देने की सूचना मिलने पर परिजनों में कोहराम मच गया। वहीं, इस से ग्रामीण भी खासे दुखी दिखे। मौसम की आत्महत्या की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है।

    परिजनों ने बताया कि दो बहन और दो भाइयों में सबसे छोटा मौसम पॉलिटेक्निक की पढ़ाई करने के बाद प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए चांदपुर सलोरी (प्रयागराज) में अपने दोस्त के साथ रहता था। सोमवार की रात मौसम के फांसी लगाने की सूचना मिलते ही दादा रघुनाथ यादव बेसुध हो गए।

    बड़ी ही मुश्किल से उन्होंने खुद को संभालते हुए कहा कि परिवार के एक भी सदस्य ने उसे कभी डांटा तक नहीं था। क्या कमी हो गई थी कि उसने ऐसा कदम उठा लिया, समझ में नहीं आ रहा है। मौसम काफी मिलनसार और व्यावहारिक था।

    दादा बिलखते हुए कह रहे थे कि खेती में खटकर रुपयों का इंतजाम कर बच्चे को पढ़ाया था। उसने यह क्या कर दिया। वहीं मां सुनीता देवी चारपाई पर बेहोश पड़ी हुई थी। मां को संभाले हुई बड़ी बहन प्रकृति, आयुषी और भाई शीर्षक की आंखों से भी आंसुओं की धार नहीं रुक रही थी।

    वाराणसी के सेवापुरी क्षेत्र के गद्दोपुर गांव निवासी जीत नारायन यादव के बेटे मौसम यादव (23) के प्रयागराज में फंदा लगाकर जान देने की सूचना मिलने पर परिजनों में कोहराम मच गया। वहीं, इस से ग्रामीण भी खासे दुखी दिखे। मौसम की आत्महत्या की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है।

    परिजनों ने बताया कि दो बहन और दो भाइयों में सबसे छोटा मौसम पॉलिटेक्निक की पढ़ाई करने के बाद प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए चांदपुर सलोरी (प्रयागराज) में अपने दोस्त के साथ रहता था। सोमवार की रात मौसम के फांसी लगाने की सूचना मिलते ही दादा रघुनाथ यादव बेसुध हो गए।

    बड़ी ही मुश्किल से उन्होंने खुद को संभालते हुए कहा कि परिवार के एक भी सदस्य ने उसे कभी डांटा तक नहीं था। क्या कमी हो गई थी कि उसने ऐसा कदम उठा लिया, समझ में नहीं आ रहा है। मौसम काफी मिलनसार और व्यावहारिक था।

    दादा बिलखते हुए कह रहे थे कि खेती में खटकर रुपयों का इंतजाम कर बच्चे को पढ़ाया था। उसने यह क्या कर दिया। वहीं मां सुनीता देवी चारपाई पर बेहोश पड़ी हुई थी। मां को संभाले हुई बड़ी बहन प्रकृति, आयुषी और भाई शीर्षक की आंखों से भी आंसुओं की धार नहीं रुक रही थी।

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